कोरोना काल मे बचत खाते से कमाई बढ़ाने का नुस्खा

 

RBI के अनुसार 5 जून को खत्म हुए पखवाड़े के लिए बैंक डिपॉजिट में 11.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि में क्रेडिट ग्रोथ दर 6.2 प्रतिशत रही। यानी बैंकों के पास ऋण देने के अपेक्षा जमा के रूप में ज्यादा पैसा आया। इसी कारण बैंकों ने अपने मार्जिन को संभालने के लिए जमा दरों में कटौती की। इसके अलावा आरबीआई ने रेपो रेट में कमी की, जिससे बैंकों को अपनी उधार दरों को कम करना पड़ा। मगर साथ ही बैंकों ने जमा पर दी जाने वाली ब्याज दर को भी कम कर दिया। मगर अब बैंकों ने एक नई सुविधा शुरू की है, जिससे आपको बचत खाते में जमा पैसे पर ज्यादा ब्याज मिल सकता है।

अब अच्छी खबर यह है कि हर भारतीय बैंक अब आपको बचत खाते पर थोड़ा और ज्यादा पैसा कमाने के लिए ‘स्वीप-आउट’ और ‘स्वीप-इन’ सुविधाएं प्रदान करता है। संभव है कि आपके बैंक ने भी बचत खाते पर ब्याज दरों को कई सालों के निचले स्तर तक कम कर दिया होगा। कुछ लोग अपने पैसे को बैंक खाते में ही रखना पसंद करते हैं। बचत खाता सुरक्षित है और इमरजेंसी खर्चों को लिए आपको यहां लिक्विडिटी भी मिलती है। यानी आप जरूरत के समय जल्दी पैसा हासिल कर सकते हैं। मगर इस पर आपको ब्याज अधिक नहीं मिलता।

इन खातों को फ्लेक्सी-जमा खातों और कई अन्य नामों से भी जाना जाता है। विभिन्न बैंकों मे भी इस सुविधा के अलग नाम हो सकते हैं। साथ ही एफडी की अवधि जैसे फीचर्स भी अलग हो सकते हैं। बचत खाता चुनने में आपके लिए जरूरी होगा कि क्या बैंक ऐसे खाते की पेशकश करता है या नहीं और दूसरी बात है ब्याज दर, क्योंकि यही आपकी कमाई को बढ़ाएगी। देश का लगभग हर कमर्शियल बैंक स्वीप-इन स्वीप-आउट खाता सुविधा प्रदान करता है।

ये ऑटोमैटिक ‘स्वीप-आउट’ सुविधा वाले विशेष बचत खाते हैं, जिनमें आपके सरप्लस फंड को एफडी में डाल दिया जाता है और जब आपको पैसों की आवश्यकता होती है या जब आपका बैंक खाते में कम पैसे होते हैं तो एफडी स्वयं ही खत्म हो जाएगी और पैसा आपके खाते जमा हो जाएगा ताकि खाते में लो बैलेंस न रहे। इससे ये सुनिश्चित होता है कि आपके बैंक खाते में पैसा बेकार नहीं गया और आपको नियमित बचत बैंक खाते की तुलना में अधिक ब्याज के माध्यम से बेहतर रिटर्न मिलता है। क्योंकि बैंक बचत खातों के मुकाबले एफडी पर अधिक ब्याज मिलता है।
अच्छी बात ये है कि आपको नियमित रूप से बेकार फंड्स को ट्रैक करने की आवश्यकता नहीं होती। आपको सिर्फ बचत खाते से एफडी बनाने के लिए बैंक को निर्देश देना होता है। इश सुविधा का लाभ उठाने के लिए जैसे ही आप बैंक को निर्देश देते हैं एफडी में पैसा ट्रांसफर होने की प्रोसेस ऑटोमैटिक शुरू हो जाती है। निर्देश में आपको ये भी बैंक को बताना होगा कि सरप्लस किस राशि से ऊपर माना जाए। आप 10,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक कहीं भी लिमिट तय कर सकते हैं। एक बार जब आपके बचत खाते में पैसा इस लिमिट के ऊपर पहुंच जाता है तो बैंक 1 से 5 साल की अवधि के लिए सरप्लस अमाउंट के लिए एफडी बनाता है। जब एफडी मैच्योर हो जाएगी तो यह बैंक ऑटोमैटिक रूप से रिन्यू भी हो जाती है।